किस समय शनिदेव की पूजा करना होता है शुभ,क्या करें दान और किन मन्त्रों का करें जाप अवश्य जानिये,

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Haridwar Crime NEWS

शास्त्रों के अनुसार, शनिदेव पश्चिम दिशा के स्वामी माने जाते हैं. वहीं सूरज पूरब दिशा की ओर से निकलते हैं और ऐसे में पूरब दिशा की ओर शनिदेव की पीठ पड़ती है. जिसेक कारण शनिदेव की पूजा सूर्योदय से पहले या फिर सूर्यास्त के बाद की जाती है. सूर्यास्त के बाद शनिदेव की पूजा करने से शनिदेव जल्द प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि भर देते हैं. वहीं शनि और सूर्य की बात करें, तो दोनों के बीच पिता और पुत्र का संबंध है, लेकिन ये एक दूसरे से बैर का बाव रखते हैं. वहीं सुबह से लेकर शाम तक सूर्यदेव का ही प्रभाव होता है, इसलिए सूर्यास्त के बाद शनिदेव की पूजा करनी चाहिए.

शनिदेव को कर्मफलदाता कहा जाता है, क्योंकि इनके पास सभी व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब होता है, वह व्यक्ति के कर्मों के हिसाब से उसका फल देते हैं. अगर शनिदेव आपके ऊपर मेहरबान हो गए, तो व्यक्ति के जीवन में खुशियां ही खुशियां रहती है. लेकिन अगर शनिदेव की टेढ़ी नजर व्यक्ति पर पड़ जाए, तो उसका जीवन कष्टों में बीतता है.  कहा जाता है कि कुंडली में यदि शनि देव की स्थिति अच्छी हो तो व्यक्ति को जीवन में खूब सफलता मिलती है। वहीं शनि जब अशुभ हो तो जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। शनि देव के प्रकोप से मनुष्यों के जीवन में नौकरी, व्यापार, स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियां आती रहती हैं। यही वजह है कि शनि की ढैया या साढ़ेसाती से प्रभावित लोग काफी परेशान हो जाते हैं। ऐसे में शनि देव के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए शनिवार के दिन विशेष पूजा और कुछ उपाय करना लाभदायक हो सकता है। चलिए जानते हैं शनि देव को प्रसन्न करने के लिए कुछ उपाय…

पीपल की पूजा
शनिवार के दिन सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ की पूजा करें। इससे आपके ऊपर शनि देव की कृपा के साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है।

हनुमानजी की उपासना

हनुमान जी की पूजा करने वालों पर हमेशा शनिदेव की कृपा बनी रहती है, इसलिए शनिवार को शनि देव की पूजा के साथ हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए। अगर आप शनि देव की कृपा पाना चाहते हैं तो सूर्य अस्त होने के बाद हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।
छाया दान
शनिवार के दिन लोहे की कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमे अपना चेहरा देख लें। इसके बाद इस तेल को शनि मंदिर में दान कर दें। ऐसा कुछ शनिवार तक लगातार करने से शनि से जुड़ी समस्याएं काफी हद तक दूर हो जाती हैं।
दान करें ये चीजें 
शनिवार के दिन एक किलो सप्तधान, आधा किलो काले तिल, आधा किलो काला चना, कुछ लोहे की कील, एक शीशी सरसों का तेल लें और इन सभी चीजों को एक कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। फिर इस पोटली को शनि मंदिर में दान कर दें। इस उपाय से शनिदेव आपके सभी कष्ट दूर करेंगे।

इन मंत्रों का करें जाप…..

शनिवार के दिन ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’ और ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ इन दो मंत्रों का जाप करें। साथ ही शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शनि चालीसा और शनिदेव की आरती भी करें। इससे शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। 

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