पी आर डी की 21 साल पुरानी भर्ती पर सवाल! चयन प्रक्रिया में कथित धांधली की जांच की उठ सकती है मांग, फर्जी फिजिकल पर भर्ती होने का सनसनीखेज आरोप
HARIDWAR CRIME NEWS
2005 पी आर डी रोशनाबाद फिजिकल टेस्ट पर उठे गंभीर सवाल – जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज, वेतन रिकवरी तक की बन सकती है नौबत,जल्दी ही जिलाधिकारी को शिकायत पत्र देकर जाँच कि होंगी मांग,
हरिद्वार/रोशनाबाद:
प्रांतीय रक्षक दल (PRD) की वर्ष 2005 की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी ने पूरे सिस्टम पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि उस समय रोशनाबाद स्टेडियम में आयोजित फिजिकल परीक्षण के दौरान बड़े स्तर पर धांधली हुई थी, जिसमें एक अभ्यर्थी के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा शारीरिक दक्षता परीक्षा दी गई।
बताया जा रहा है कि जिस व्यक्ति का चयन हुआ, वह न तो शारीरिक रूप से सक्षम था और न ही दृष्टि मानकों पर खरा उतरता था। इसके बावजूद वह पिछले लगभग 21 वर्षों से लगातार PRD में ड्यूटी करता आ रहा है। यह तथ्य यदि सही पाया जाता है, तो यह न केवल भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में ला सकता है।
कानूनी पहलू: गंभीर धाराओं में हो सकती है कार्रवाई,
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराओं के अंतर्गत आ सकता है, जैसे—
धोखाधड़ी (Cheating),जालसाजी (Forgery)फर्जी दस्तावेजों का उपयोग (Use of forged documents)
सरकारी सेवा में धोखे से नियुक्ति है तो ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर न केवल सेवा समाप्ति तय मानी जाती है, बल्कि कारावास और आर्थिक दंड भी संभव है।
नारको टेस्ट की भी उठ सकती है मांग-सूत्रों का कहना है कि यदि सरकार इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए और जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति का नारको टेस्ट कराया जाए, तो सच्चाई सामने आने मे समय नहीं लगेगा। हालांकि नारको टेस्ट केवल न्यायालय की अनुमति और विशेष परिस्थितियों में ही संभव होता है।
21 साल का वेतन भी हो सकता है वापस!
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियुक्ति को फर्जी पाया गया, तो सरकार संबंधित व्यक्ति से पिछले 21 वर्षों में प्राप्त वेतन की रिकवरी भी कर सकती है। अनुमान के अनुसार यह राशि 70 से 80 लाख रुपये तक हो सकती है। यह कार्रवाई “अवैध लाभ की वसूली” के सिद्धांत के तहत की जा सकती है।
फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर ये मुद्दे तूल पकड़ सकते है।क्योंकि जल्दी ही इस पुरे मामले की जांच के लिए एक शिकायत पत्र जिलाधिकारी हरिद्वार को सोपने की तैयारी हो चुकी है जिसके बाद इस मामले मे सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिक भी निष्पक्ष जांच की मांग अवश्य करेंगे कि यदि आरोप सही हैं, तो यह अन्य मेहनती युवाओं के साथ बड़ा अन्याय है और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
यदि यह मामला सच साबित होता है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की फर्जी नियुक्ति का मामला नहीं होगा, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करेगा। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनायेगे —
