रोशनाबाद: राजस्व और खनन विभाग की मिलीभगत से नदियों में अवैध खनन का तांडव, रात के अंधरे मे गरज रहे ट्रेक्टर ही ट्रेकर,

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HARIDWAR CRIME NEWS

हरिद्वार जनपद के रोशनाबाद क्षेत्र में खनन माफियाओं का काला कारोबार दिन-ब-दिन बेकाबू होता जा रहा है। नदियों से बेधड़क रेत, बजरी और पांगी का अवैध खनन किया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब कुछ राजस्व विभाग और खनन विभाग की कथित मिलीभगत से ही सम्भव है।क्योंकि जिस स्थान पर ये अवैध खनन हो रहा है वो प्रसाशनिक भवन से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है,रात के अंधेरे में मशीनें और ट्रेक्टर नदियों से खनिज निकाल रहे हैं, लेकिन प्रशासन की आंखों पर जैसे पट्टी बंधी हुई है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि खनन माफिया रात 8 बजे के बाद से ही सक्रिय हो जाते हैं। नदी किनारे मशीनें खड़ी कर दी जाती हैं और पूरी रात ट्रेक्टरो में रेत, बजरी और पांगी भरकर क्षेत्र मे भेजी जाती है। यह पूरा खेल राजस्व और खनन विभाग की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। सवाल उठता है कि आखिर इतनी बड़ी-बड़ी मशीनें और डंपर खनन विभाग व प्रशासन की नज़र से कैसे बच जाते हैं?

नदियों का अस्तित्व खतरे में,

रेत-बजरी की अंधाधुंध निकासी से नदियों का अस्तित्व भी खतरे में है। अवैध खनन के चलते नदी की गहराई लगातार बढ़ रही है जिससे बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। आस पास के लोगों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले वर्षों में नवोदय नगर और आस-पास के क्षेत्र में जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो सकता है

क्षेत्र वासियों में आक्रोश, लेकिन आवाज दबाई जाती है

स्थानीय ग्रामीण कई बार प्रशासन और खनन विभाग से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन नतीजा बे असर ही रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफियाओं की पकड़ इतनी मजबूत है कि आवाज उठाने वालों को धमकियां दी जाती हैं। मजबूरी में शिकायत कर्ता चुप रहने पर विवश हैं।

खनन विभाग की मिली भगत से सरकार को हो रहा नुकसान

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिन विभागों का काम खनन पर रोक लगाना है वही विभाग इस गोरखधंधे में शामिल बताए जा रहे हैं। राजस्व व खनन विभाग के अधिकारियों का इसमें शामिल होने की चर्चाएं आम हैं। रात में जब ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर धड़ल्ले से चलते हैं तो इस समय ना तो राजस्व अधिकारी इधर का रुख करते है ओर ना ही खनन विभाग,

जनता को बड़ी कार्रवाई की आस

ग्रामीण और सामाजिक संगठन अब इस पूरे प्रकरण पर कड़ी कार्रवाई की मांग करने की तैयारी मे हैं। उनका कहना है कि जब तक खनन माफियाओं और उनकी मदद करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक नदियों की लूट बंद नहीं होगी। क्षेत्र वासियों का साफ कहना है कि मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों को इस मामले में खुद हस्तक्षेप करना चाहिए।

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